जीवन क्या है ,सोचता हूँ तो एक ही उत्तर मिलता है की जीवन युद्घ है ..................केवल युद्घ ।
जब से जन्म लिया तब से अब तक केवल युद्घ ही ही युद्घ को अपने आगे पाया है कभी कभी तो मन में यही विचार आता है की क्या मनुष्य ६४ लाख जीवन भोगने के बाद जब इस दुनिया में आत्ता है तो सब लोग खुसी मानते हैं ? क्या यह खुसी केवल जीवन पर्यंत युद्घ करने के लिए है हमने महसूस के थी बहुत बरी उलझन है यह पर जीवन में अगर आया है तो जीना तो परेगा ही फ़िर चाहे कुछ भी सहना पड़े क्या यह जीवन हमें इस लिये मिला की जीस बड़े भाई को मेरी अपने माँ ने जन्म दिया व्हो एक मकान के लिए चोट्टे भाई को कोर्ट में घसीटे और वो भतीजा जो मेरी छाती पर सोया करता था बचपन में वो सामने से कहे की वो मेरे को जान से मार देगा क्या इसी दिन के लिए हम जन्म लेते है और मरने के बाद ६४ लाख जीवन भोगने के बाद मनुष्य जीवन पाए अपनों से ही इस तरहें का व्यव्हार पायें बहुत ही शर्म की बात है ।
क्या इसी युद्घ के लिए हमने जन्म लिया था ।
क्या इसे दिन के लिए हमने जन्म लिया था ?
Thursday, September 24, 2009
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how true every relation is based on money people leave for money, smile for money, go out for money, leave their own motherland/ country for money/ even birth to a child is given to earn money in future...... money is everthing.
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